साइकिल से घुमक्कडी करते कुंदन आर्य
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गांवदेहात डायरी वह नौजवान साइकिल पर आगे एक बोर्ड लगाये था और पीछे कैरियर पर
एक बैग। पहली नज़र में लगा—कोई फेरीवाला होगा, जो सवेरे-सवेरे निकल पड़ा है।
गांव ...
12 hours ago
1 comment:
चलेगी कहाँ तक सियासत तुम्हारी
सभी को पता है शराफत तुम्हारी
बहुत हो चुका अब न वादे करो तुम
की हम जानते हैं हकीकत तुम्हारी.
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