मोबाइल नहीं, डिजिटल कल्पवास चाहिए
-
मोबाइल को जीवन में रस और जीवन के बड़े अर्थ से जोड़ने का उपक्रम सुबह साइकिल
लेकर निकलता हूँ। घरपरिसर में ही गोल गोल चक्कर। साइकिल बहुत तेज नहीं
चलाता—इतनी ही...
6 days ago
1 comment:
चलेगी कहाँ तक सियासत तुम्हारी
सभी को पता है शराफत तुम्हारी
बहुत हो चुका अब न वादे करो तुम
की हम जानते हैं हकीकत तुम्हारी.
Post a Comment